“नववर्ष में आपके लिए मेरी प्रार्थना” श्री दया माता द्वारा

3 जनवरी, 2025

निम्नलिखित अंश श्री दया माता की पुस्तक केवल प्रेम : नित्य परिवर्तनशील जगत् में आध्यात्मिक जीवन शैलीमें दिए गए प्रवचन “नववर्ष एक आध्यात्मिक सुअवसर” से लिया गया है। श्री दया माता, जो परमहंस योगानन्दजी की निकटतम शिष्यों में से एक थीं, ने 1955 से लेकर 2010 में अपने देहावसान तक योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया/सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप की अध्यक्ष के रूप में सेवा की।

इस नववर्ष में, आपमें से प्रत्येक के लिए मेरी प्रार्थना है कि आप आध्यात्मिक पथ पर अपने महानतम और सर्वश्रेष्ठ उद्देश्यों की पूर्ति कर सकें।

आप सब जो दिव्य प्रेम खोज रहे हैं, मेरी प्रार्थना है कि आप इसे प्राप्त करें; आप सब जो सहृदयता एवं सहानुभूति चाह रहे हैं, इन्हें मानव संबंधों में नहीं बल्कि ईश्वर में खोजें जो समस्त सहृदयता एवं सहानुभूति का स्रोत हैं। जो शक्ति, उत्साह, अथवा विनम्रता पाना चाहते हैं, आप सब उस महान् गुरु की शरण में पहुँचें जो आपको इन गुणों को प्राप्त करने में सहायता कर सकें, जो आपके अन्तर में सुप्त दिव्यता को जाग्रत कर सकें जिससे कि आप स्वयं को ईश्वर की सच्ची सन्तान के रूप में देख सकें।

मैं अपनी स्मृति में, हमारे दिव्य गुरुदेव को नववर्ष के अवसर पर प्रेरित करते हुए सुनती हूँ : “जागो, अब और मत सोओ! जागो, अब और मत सोओ! जागो, अब और मत सोओ!”

शांति, आनन्द, सुख और दिव्य प्रेम को पाने का मार्ग है — अपनी चेतना को ईश्वर पर केन्द्रित करना और ईश्वर में लगाए रखना। मात्र इसी एक विचार पर मन को केन्द्रित रखें : केवल ईश्वर। “आप ही मेरे जीवन का ध्रुवतारा हैं, मैं आप ही में वास करता हूँ, विचरण करता हूँ श्वास लेता हूँ, और अपना अस्तित्त्व रखता हूँ। मैं आपसे प्रेम करने और आपकी सेवा करने के सिवाय और कुछ नहीं चाहता।” नववर्ष में इसे ही अपनी अनवरत प्रार्थना बनाएँ।

दिन और रात मन को ईश्वर में ही लगाए रखें और उनके प्रेम में मतवाले बन जाएँ। केवल वे ही सत्य हैं। केवल उनके प्रेम में ही ज्ञान, विनम्रता, आनन्द, दया, विवेक, और परिपूर्णता विद्यमान है। हम में से प्रत्येक उस प्रेम को अधिक तत्परता के साथ खोजें।

अधिक गहनतापूर्वक ध्यान करें और तीव्रतम इच्छा, निष्ठा, और एकाग्रता के साथ ईश्वर की सेवा करने का प्रयास करें।

केवल सेवा करना ही पर्याप्त नहीं है; बल्कि इसे परम सौभाग्य समझें और हृदय में उत्साह, आनन्द और प्रेम के साथ सेवा करें।

प्रभु के लिए भक्ति भरे गीत गाते हुए, हम नववर्ष के प्रत्येक दिन में सदा उस आनन्ददायक चेतना को बनाए रख सकें, ताकि हम केवल प्रभु का विचार करते हुए वर्ष को उसी तरह समाप्त करें जैसे हमने आरम्भ किया था।

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